KP पद्धति का केंद्र
कृष्णमूर्ति पद्धति (KP) में ग्रह की राशि के साथ नक्षत्र-स्वामी और उप-स्वामी को विश्लेषण में महत्वपूर्ण माना जाता है। भावों के लिए कस्प की गणना भी केंद्रीय है। इस पद्धति की शब्दावली पाराशरी अध्ययन से कुछ जगह अलग है, इसलिए दोनों के नियम बिना बताए मिलाने से भ्रम होता है।
शुरुआती शब्दावली
- कस्प: भाव के आरंभिक बिंदु की गणना; KP में प्लेसिडस भाव-पद्धति का उपयोग प्रचलित है।
- स्टार-लॉर्ड और सब-लॉर्ड: ग्रह/कस्प के नक्षत्र और उसके उप-विभाग से जुड़े स्वामी।
- सिग्निफिकेटर: निर्दिष्ट प्रश्न से संबंधित भावों के संकेतक ग्रह।
- रूलिंग प्लैनेट्स: प्रश्न और समय-संदर्भ में अध्ययन किया जाने वाला समूह।
आगे कैसे पढ़ें?
जन्म-समय संशोधन, प्रश्न-कुंडली और घटना-काल के लिए पहले गणना विश्वसनीय होनी चाहिए। किसी एक सब-लॉर्ड से निश्चित निष्कर्ष बताने के बजाय पूरा संदर्भ और प्रयुक्त नियम दर्ज करें।
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