भाव क्या दर्शाता है?
कुंडली में भाव जीवन के विषयों को क्रमबद्ध करने का माध्यम हैं। प्रथम भाव से शरीर और स्वयं की चर्चा शुरू होती है; द्वितीय में वाणी और संसाधन, तृतीय में प्रयास, चतुर्थ में घर, पंचम में विद्या, षष्ठ में सेवा/संघर्ष, सप्तम में संबंध, अष्टम में परिवर्तन, नवम में धर्म और अध्ययन, दशम में कर्म, एकादश में लाभ तथा द्वादश में व्यय जैसे पारंपरिक विषय देखे जाते हैं। ये संकेतात्मक क्षेत्र हैं, अंतिम फैसले नहीं।
राशि और भाव में अंतर
राशि आकाशीय 30 अंश के खंड का नाम है; भाव जन्म-स्थान और समय के आधार पर जीवन-क्षेत्र की पढ़ाई का ढाँचा है। अलग भाव-पद्धतियों में कस्प और भाव-संधि के विवरण बदल सकते हैं। पद्धति का नाम दर्ज रखना ज़रूरी है, विशेषकर जब पाराशरी और KP के निष्कर्ष तुलना में हों।
पढ़ने का क्रम
पहले लग्न और भाव-विन्यास पहचानें, फिर भाव के स्वामी की स्थिति, संबंधित ग्रह और दृष्टियाँ देखें। उसके बाद दशा और गोचर का संदर्भ जोड़ें। एक भाव पर कई संकेत सहमत न हों तो अनिश्चितता को स्पष्ट रखना अध्ययन का हिस्सा है।
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