Astrological HarshAuthor · Teacher · Researcher
अध्ययन · संस्कृत · शास्त्रीय संदर्भSTUDY · SANSKRIT · CLASSICAL REFERENCES

लघुपाराशरी · अध्याय 4 · चतुर्थोऽध्यायः (मारकाध्यायः)

शास्त्रीय ग्रंथ केन्द्र / लघुपाराशरी

5/5 संस्कृत अध्याय संग्रहित; स्रोत का अलग हिन्दी अर्थ शामिल नहीं।

मूल मुद्रित संस्करण से पूर्ण प्रूफरीड शेष है। OCR/टाइपिंग त्रुटियाँ और संस्करणों के पाठभेद संभव हैं। अनुवाद जहाँ उपलब्ध है वहीं दिखता है। मशीन अनुवाद का मसौदा और संपादक द्वारा जाँचा अनुवाद अलग चिह्नित हैं।

लघुपाराशरी 4.23

अष्टमं ह्यायुषः स्थानमष्टमादष्टमं च यत् ।
तयोरपि व्ययस्थानं मारकस्थानमुच्यते ॥ २३ ॥

लघुपाराशरी 4.24

तत्राप्याद्यव्ययस्थानादुत्तरं बलवत्तरम् ।
तदीशितुस्तत्रगताः पापिनस्तेन संयुताः ॥ २४ ॥

लघुपाराशरी 4.25

तेषां दशाविपाकेषु संभवे निधनं नृणाम् ।
तेषामसम्भवे साक्षाद् व्ययाधीशदशास्वपि ॥ २५ ॥

लघुपाराशरी 4.26

अलाभे पुनरेतेषां सम्बन्धेन व्ययेशितुः ।
क्वचिच्छुभानां च दशास्वष्टमेशदशासु च ॥ २६ ॥

लघुपाराशरी 4.27

केवलानां च पापानां दशासु निधनं क्वचित् ।
कल्पनीयं बुधैर्नृणां मारकाणामदर्शने ॥ २७ ॥

लघुपाराशरी 4.28

मारकैः सह सम्बन्धान्निहन्ता पापकृच्छनिः ।
अतिक्रम्येतरान् सर्वान् भवत्येव न संशयः ॥ २८ ॥

← पिछला अध्याय अगला अध्याय →

पाठ का स्रोत और उपयोग अधिकार

संस्कृत विकिस्रोत के योगदानकर्ता · CC BY-SA 4.0 · सुरक्षित प्रति: 2026-10-11

विकिस्रोत से सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक पाठ; मूल मुद्रित संस्करण का OCR नहीं अध्याय और श्लोकों में विभाजन, नेविगेशन हटाया; पाठ की वर्तनी अपरिवर्तित।

CC BY-SA 4.0

अध्याय 4 · स्रोत संस्करण: https://sa.wikisource.org/wiki/%E0%A4%B2%E0%A4%98%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A5%80