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बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · अध्याय 49 · अध्यायः ४९ (कालचक्रदशाफलाध्यायः)

शास्त्रीय ग्रंथ केन्द्र / बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्

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बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् 49.17

सिंहे च पुत्रलाभश्च मिथुने शत्रुवर्द्धनम् |
वृषेः चतुष्पदाल्लाभो मेषांशे पशुतो भयम् |
मीने तु दीर्घयात्रा स्यात् सिंहस्य नवभागके ||१७||

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पाठ का स्रोत और उपयोग अधिकार

संस्कृत विकिस्रोत के योगदानकर्ता · CC BY-SA 4.0 · सुरक्षित प्रति: 2026-10-11

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अध्याय 49 · स्रोत संस्करण: https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AC%E0%A5%83%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AA%E0%A5%AF_(%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%9A%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83)&oldid=85833