बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् 89.89
अथैक नक्षत्र जातशान्त्यध्यायः ॥ ८९॥
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अथैक नक्षत्र जातशान्त्यध्यायः ॥ ८९॥
अथ यद्येकनक्षत्रे भ्रात्रोर्वा पितृपुत्रयोः ।
प्रसूतिश्च तयोर्मृतुरथैवकस्य निश्चयः ॥ १॥
तत्र शान्तिं प्रवक्ष्यामि गर्गादिमुनिभाषितम् ।
सुदिने शुभनक्षत्रे चन्द्रताराबलान्विते ॥ २॥
रिक्तावविष्टिविवर्ज्ये च समय शान्तिमाचरेत् ।
शनेरीशानदिग्भागे नक्षत्रप्रतिमां शुभाम् ॥ ३॥
तन्नक्षत्रोक्तमन्त्रेण पूजयेत् कलशोपरि ।
रक्तवस्त्रेण संछाद्य वस्त्रयुग्मेन वेष्टयेत् ॥ ४॥
स्वस्वशाखोक्तमार्गेण कुर्यादग्निमुखं तथा ।
पुनस्तेनैव मन्त्रेण हुनदष्टोत्तरं शतम् ॥ ५॥
प्रत्येकं समिदन्नाज्यैः प्रायश्चित्तान्तमेव हि ।
अभिषेकं ततः कुर्यादाचार्यश्च द्वयोरपि ॥ ६॥
ऋत्विग्भ्यो दक्षिणां दद्यादाचार्याय विशेषतः ।
ब्राह्मणान् भोजयेद् भक्त्या वित्तशाठ्यविवर्जितः ॥ ७॥
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