बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् 69.69
अठ पिण्दसाढनाढ्यायः ॥ ६९॥
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अठ पिण्दसाढनाढ्यायः ॥ ६९॥
एवं शोढ्यावशेषाङ्कं राशिमानेन वर्ध्ढयेथ् ।
ग्रहयुक्थे च थध्राशौ ग्रहमानेन वर्ध्ढयेथ् ॥ १॥
सर्वेषां च पुनर्योगः पिण्दाख्यः कठ्यथे ध्विज ।
गोसिंहौ धशभिर्गुण्यौ वसुभिर्युग्मव्त्ऱ्श्चिकौ ॥ २॥
सप्थभिस्थुलमेषौ च म्त्ऱ्गकन्ये च पञ्चभिः ।
शेषाः स्वसंख्यया गुण्या ग्रहमानमठोच्यथे ॥ ३॥
जीवारशुक्रसौम्यानां धशाष्तनगसायकाः ।
पञ्च शेषग्रहाणां च मानं प्रोक्थमिधं क्रमाथ् ॥ ४॥
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