Astrological HarshAuthor · Teacher · Researcher
अध्ययन · संस्कृत · शास्त्रीय संदर्भSTUDY · SANSKRIT · CLASSICAL REFERENCES

षट्पञ्चाशिका · अध्याय 1 · अध्यायः १

शास्त्रीय ग्रंथ केन्द्र / षट्पञ्चाशिका

7 अध्यायों में केवल पहला अध्याय स्रोत में उपलब्ध; शेष छह अध्याय अभी नहीं हैं। यह पूर्ण षट्पञ्चाशिका नहीं है।

मूल मुद्रित संस्करण से पूर्ण प्रूफरीड शेष है। OCR/टाइपिंग त्रुटियाँ और संस्करणों के पाठभेद संभव हैं। अनुवाद जहाँ उपलब्ध है वहीं दिखता है। मशीन अनुवाद का मसौदा और संपादक द्वारा जाँचा अनुवाद अलग चिह्नित हैं।

षट्पञ्चाशिका 1

प्रणिपत्य रविं मूर्ध्ना वराहमिहिरात्मजेन पृथुयशसा । प्रश्ने कृतार्थगहना परार्थमुदिश्य सद्यशसा ।। १ ।।
लग्नचतुर्थसप्तमदशानां स्थानानां विचारप्रविभागमाह
च्युतिर्विलग्नाद्धिबुकाच्च वृद्धिर्मध्यात् प्रवासोऽस्तमयान्निवृत्तिः । वाच्यं ग्रहैः प्रश्नविलग्नकालाद् गृहं प्रविष्टो हिबुके प्रवासी ।। २ ।।
अधुना तन्वादीनां द्वादशभावानां शुभाशुभज्ञानमाह
यो यो भावः स्वामिदृष्टो युतो वा
     सौम्यैर्वा स्यात्तस्य तस्यास्ति वृद्धिः ।
पापैरेवं तस्य भावस्य हानि-
     र्निर्देष्टव्या पृच्छतां जन्मतो वा ।। ३ ।।
प्रश्नसमये लाभादौ शुभाशुभज्ञानमाह
सौम्ये विलग्ने यदि वाऽस्य वर्गे शीर्षोदये सिद्धिमुपैति कार्यम् । सतो विपर्यस्तमसिद्धिहेतुः कृच्छ्रेण संसिद्धिकरं विमिश्रम् ।। ४ ।।
नष्टलाभज्ञानमाह
होरास्थितः पूर्णतनुः शशाङ्को जीवेन दृष्टो यदि वा सितेन । क्षिप्रं प्रणष्टस्य करोति लब्धिं लाभोपयातो दलवाञ्छुभश्च ।। ५ ।।
ह्रतनष्टमुष्टिगतचिन्त्तितानां धातुमूलजीवानां परिज्ञानमाह
स्वांशं विलग्ने यदि वा त्रिकोणे
     स्वांशे स्थितः पश्यति धातुचिन्ताम् ।
परांशकस्थश्च करोति जीवं
     मूलं परांशोपगतः परांशम् ।। ६ ।।
प्रकारान्तरेणाह
धातुं मूलं जीवमित्योजराशौ युग्मे विद्यादेतदेव प्रतीपम् । लग्ने योंऽशस्तत्क्रमाद् गण्य एवं सङ्क्षेपोऽयं विस्तरात्तत्प्रभेदः ।। ७ ।।

← पिछला अध्याय

पाठ का स्रोत और उपयोग अधिकार

संस्कृत विकिस्रोत के योगदानकर्ता · CC BY-SA 4.0 · सुरक्षित प्रति: 2026-10-11

विकिस्रोत से सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक पाठ; मूल मुद्रित संस्करण का OCR नहीं अध्याय और श्लोकों में विभाजन, नेविगेशन हटाया; पाठ की वर्तनी अपरिवर्तित।

CC BY-SA 4.0

अध्याय 1 · स्रोत संस्करण: https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B7%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%9E%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A7&oldid=286118