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बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · अध्याय 81 · अध्यायः ८१ (अंगलक्षणफलाध्यायः)

शास्त्रीय ग्रंथ केन्द्र / बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्

97 अध्यायों की सूची; 91 अध्यायों का पाठ उपलब्ध। अध्याय 16, 18, 20, 22, 23 और 35 में स्रोत का गलत दोहराव मिलने से पाठ रोका गया है। यह अभी पूर्ण BPHS नहीं है।

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बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् 81.22

चिपिटौ रोमशौ यस्या विधवा दुर्भगा च सा ।
चतुर्भिर्विशतियुतैरंगुलैश्च समा कटिः ।
समुन्नतनितम्बाढ्या प्रशस्ता स्यात् मृगीदृशाम् ॥ २२॥

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पाठ का स्रोत और उपयोग अधिकार

संस्कृत विकिस्रोत के योगदानकर्ता · CC BY-SA 4.0 · सुरक्षित प्रति: 2026-10-11

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अध्याय 81 · स्रोत संस्करण: https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AC%E0%A5%83%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AE%E0%A5%A7_(%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83)&oldid=85890