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बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · अध्याय 46 · अध्यायः ४६ (दशाध्यायः)

शास्त्रीय ग्रंथ केन्द्र / बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्

97 अध्यायों की सूची; 91 अध्यायों का पाठ उपलब्ध। अध्याय 16, 18, 20, 22, 23 और 35 में स्रोत का गलत दोहराव मिलने से पाठ रोका गया है। यह अभी पूर्ण BPHS नहीं है।

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स्रोत में दोहराए श्लोक क्रमांक मिले; पहली प्रति रखी गई।

बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् 46.129

मिश्रगृहैश्च संयुक्ते मिश्रं फलमवाप्नुयात् |
पापक्षेत्रदशाकाले देहजीवौ तु दुःखितौ |

शुभक्षेत्रदशाकाले शुभं भवति निश्चितम् ||१२९||

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पाठ का स्रोत और उपयोग अधिकार

संस्कृत विकिस्रोत के योगदानकर्ता · CC BY-SA 4.0 · सुरक्षित प्रति: 2026-10-11

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अध्याय 46 · स्रोत संस्करण: https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AC%E0%A5%83%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AA%E0%A5%AC_(%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83)&oldid=85827