बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् 88.88
अथ भर्दावमदुर्योगशान्त्यध्यायः ॥ ८८॥
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अथ भर्दावमदुर्योगशान्त्यध्यायः ॥ ८८॥
अथाऽहं संप्रवक्ष्यामि भद्रायामवमे तथा ।
व्यातूपातादिदुर्योगे यमघण्टादिके च यत् ॥ १॥
जन्माशुभफलं प्रोक्तं तस्य शान्तिविधिं द्विज ।
प्राप्ते प्रसूतिदुर्योगे शान्तिं कुर्याद् विचक्षणः ॥ २॥
दैवज्ञैर्दर्शिते वाऽपि सुलग्ने सुदिने गृही ।
पूजनं देवतानां च ग्रहाणां यजनं तथा ॥ ३॥
शङ्करस्याऽभिषेकं च घृतदीपं शिवालये ।
आयुर्वृद्धिकरं कुर्यादश्वत्थस्य प्रदक्षिणम् ॥ ४॥
हवनं विष्णुमन्त्रेण स/तमष्टोत्तरं सुधीः ।
ब्राह्मणान् भोजयेत् शक्त्या ततः कल्याणमाप्नुयात् ॥ ५॥
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